![]() |
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों से संयम, आपसी सम्मान और सहयोग बनाए रखने की अपील की। साथ ही राज्य और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए कि कानून-व्यवस्था में किसी तरह की चूक न हो।
सुनवाई में क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने निर्देश दिया कि नमाज़ के लिए आने वाले लोगों की संभावित संख्या मुस्लिम पक्ष आज ही जिला प्रशासन को बताए। प्रशासन ज़रूरत पड़ने पर पास जारी कर सकता है या कोई और व्यावहारिक व्यवस्था कर सकता है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि:
- दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज़ के लिए परिसर के भीतर एक अलग और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए, जहां आने-जाने के लिए अलग रास्ता हो।
- इसी तरह, बसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को भी परिसर के अंदर ही एक अलग स्थान दिया जाए, ताकि वे अपने पारंपरिक अनुष्ठान कर सकें।
ASI सर्वे और हाई कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा अपील का मुख्य सवाल यह है कि क्या मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 के अपने आदेश में ASI को ऐतिहासिक स्मारक में आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से सर्वे करने का निर्देश देकर सही किया था या नहीं।
ASI को यह निर्देश दिए गए थे कि:
- कम से कम पांच वरिष्ठ विशेषज्ञों की समिति सर्वे रिपोर्ट तैयार करे।
- पूरे परिसर की फोटोग्राफी की जाए।
- बंद और सील कमरों को खोलकर वहां मिले ढांचों और कलाकृतियों की वैज्ञानिक जांच की जाए।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही 1 अप्रैल 2024 को यह साफ कर चुका है कि सर्वे के नतीजों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और ऐसी कोई खुदाई नहीं की जाएगी, जिससे स्थल का स्वरूप बदले।
फिलहाल यह बताया गया कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार वैज्ञानिक सर्वे पूरा हो चुका है और रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट के पास सुरक्षित है।
रिपोर्ट पर आगे की प्रक्रिया
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील ने मांग की कि सर्वे रिपोर्ट की कॉपी दोनों पक्षों को दी जाए और उन्हें आपत्तियां दर्ज करने का अवसर मिले। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को व्यावहारिक मानते हुए कहा कि:
- हाई कोर्ट की वरिष्ठतम जजों वाली डिवीजन बेंच, संभव हो तो दो हफ्ते के भीतर मामले की सुनवाई करे।
- रिपोर्ट को खुली अदालत में खोला जाए और दोनों पक्षों को उसकी प्रतियां दी जाएं।
- अगर रिपोर्ट का कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो वकीलों की मौजूदगी में निरीक्षण की अनुमति दी जाए।
- इसके बाद दोनों पक्षों को आपत्तियां, सुझाव या सिफारिशें दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मिले।
इन सभी बिंदुओं पर विचार के बाद हाई कोर्ट अंतिम सुनवाई कर सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला
हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि बसंत पंचमी के दिन पूरे समय धार भोजशाला में अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति दी जाए। इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जबकि परंपरागत रूप से शुक्रवार को यहां जुमे की नमाज़ होती है। इसी टकराव के कारण मामला शीर्ष अदालत तक पहुंचा।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन ने पक्ष रखा, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने बाबा कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी का प्रतिनिधित्व किया।
क्या है भोजशाला विवाद
धार स्थित भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां मौलाना कमालुद्दीन की मस्जिद स्थित है।
18वीं सदी में अंग्रेज़ों द्वारा कराई गई खुदाई में देवी सरस्वती की प्रतिमा मिलने का दावा किया जाता है, जिसे बाद में लंदन ले जाया गया। वह प्रतिमा आज भी लंदन के संग्रहालय में होने की बात कही जाती है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार और मुसलमानों को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में पूजा और नमाज़ की अनुमति है। इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को होने के कारण विवाद गहरा गया।
धार में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के मद्देनज़र धार में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। आठ हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी हो रही है और संवेदनशील इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग की जा रही है। भोजशाला परिसर में वॉच टावर और पुलिस चौकी बनाई गई है, ताकि किसी भी स्थिति पर तुरंत काबू पाया जा सके।
