बिलावली तालाब आधा खाली, बारिश न होने से आसपास के इलाकों में गहरा सकता है जलसंकट
इंदौर। शहर में इस साल मानसून की बेरुखी ने आगामी वर्ष के लिए जलसंकट की गहरी चिंता बढ़ा दी है। अगस्त का महीना खत्म होने के बाद भी शहर के प्रमुख जलस्रोत आधे से ज्यादा खाली पड़े हैं। इस कम बारिश का सबसे ज्यादा और सीधा असर बिलावली और उसके आसपास के घने रहवासी इलाकों पर पड़ने की आशंका है। कई कॉलोनियों और मल्टी-स्टोरी इमारतों में बोरिंग का पानी अभी से कम होने लगा है, जिसके चलते जल आपूर्ति के लिए लोगों को निगम और निजी टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
बिलावली क्षेत्र के निवासियों के लिए चिंता का मुख्य कारण बिलावली तालाब का लगातार गिरता जलस्तर है, जो अगस्त बीत जाने के बाद भी आधा खाली है। पिछले वर्ष इन्हीं दिनों तक यह तालाब लबालब भर चुका था और जलस्तर मेंटेन करने के लिए अतिरिक्त पानी को चैनलों के जरिए बाहर निकालना पड़ा था। इस बार स्थिति बिल्कुल विपरीत है। बिलावली के साथ-साथ शहर के अन्य प्रमुख तालाब भी खाली हैं। यशवंत सागर तालाब में 19 फीट की क्षमता के मुकाबले महज 13 फीट पानी बचा है, जबकि पिपलियापाला और पिपलियाहाना तालाब भी अपनी क्षमता तक पहुंचने के लिए अच्छी बारिश की बाट जोह रहे हैं।
जल एवं पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, बिलावली तालाब के खाली रहने का सबसे बड़ा नुकसान आगामी गर्मियों के मौसम में स्थानीय कॉलोनियों को उठाना पड़ेगा। दरअसल, तालाब में पर्याप्त पानी होने से ही उसके आसपास के बड़े हिस्से का भूजल स्तर (ग्राउंडवाटर) रिचार्ज होता रहता है, जिससे गर्मी के दिनों में भी बोरिंग चलते रहते हैं। यदि जलस्तर ऐसा ही रहा, तो अप्रैल आते-आते बिलावली के आसपास का भूजल तेजी से गिरेगा और बोरवेल सूखने की कगार पर आ जाएंगे। शहर के विजय नगर जैसे कुछ अन्य इलाकों में अभी से बोरिंग में पानी का प्रेशर काफी कम हो गया है और वहां किराये के टैंकर दौड़ाने पड़ रहे हैं, जो बिलावली क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।
अब बिलावली क्षेत्र के रहवासियों और नगर निगम प्रशासन की निगाहें सिर्फ सितंबर महीने में होने वाली बारिश पर टिकी हैं। यदि सितंबर में झमाझम बारिश नहीं होती है और बिलावली तालाब अपनी क्षमता तक नहीं भरता है, तो इस पूरे इलाके सहित इंदौर शहर को अगले साल एक भीषण जलसंकट का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।