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कैसे फैली आग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग सबसे पहले प्रांजल मेडिकल स्टोर में लगी। चूंकि दुकानें अस्थायी ढांचों में थीं और एक-दूसरे से बिल्कुल सटी हुई थीं, इसलिए आग को फैलने में कोई रुकावट नहीं आई। कुछ ही मिनटों में आग ने डॉ. आशीष राठौर के संजीवनी क्लिनिक को भी अपनी चपेट में ले लिया, जहां उस वक्त मरीजों का उपचार चल रहा था। समय रहते मरीजों और कर्मचारियों को बाहर निकाला गया, जिससे जनहानि से बचा जा सका। इसके बाद आग पास की नाश्ते की दुकान तक पहुंची और वहां रखे एलपीजी गैस सिलेंडर एक के बाद एक फटने लगे। हर विस्फोट के साथ आग की लपटें और ऊंची उठती गईं और स्थिति और अधिक भयावह होती चली गई। सिलेंडर फटने की तेज आवाजें दूर-दूर तक गूंजती रहीं और लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
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दमकल और पुलिस की कार्यवाही
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की पांच गाड़ियां तत्काल मौके पर पहुंचीं। पुलिस बल ने घटनास्थल की घेराबंदी कर भीड़ को सुरक्षित दूरी पर रोका और यातायात को वैकल्पिक मार्गों से मोड़ा। सिलेंडर विस्फोटों के जारी खतरे के बावजूद दमकलकर्मियों ने हिम्मत दिखाते हुए आग बुझाने का काम शुरू किया। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुश्किल घड़ी में सराहनीय सहयोग दिया। पुलिस, दमकल विभाग और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। तब तक प्रांजल मेडिकल स्टोर, संजीवनी क्लिनिक और नाश्ते की दुकान समेत कुल पांच प्रतिष्ठान पूरी तरह जलकर नष्ट हो चुके थे। आसपास की कई अन्य दुकानों को भी आंशिक नुकसान पहुंचा और संपत्ति के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान लाखों रुपये में बताया जा रहा है।
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घनी आबादी के बीच टली बड़ी त्रासदी
यह अग्निकांड जिस स्थान पर हुआ वह इलाका अत्यंत संवेदनशील है। घटनास्थल के ठीक पास कारमेल स्कूल और दीप ज्योति अस्पताल स्थित हैं, जहां उस वक्त लोगों की मौजूदगी थी। टाइम स्क्वायर बिल्डिंग में अनेक परिवार निवास करते हैं। यदि आग की लपटें इन इमारतों तक पहुंच जातीं तो तबाही का मंजर बेहद भयावह हो सकता था। प्रशासन की त्वरित कार्यवाही ने उस दिन एक बहुत बड़ी त्रासदी को टाल दिया। सौभाग्य से इस पूरे हादसे में किसी के गंभीर रूप से हताहत होने की सूचना नहीं है।
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अस्थायी ढांचे बने खतरे की जड़
इस घटना ने एक बार फिर अस्थायी और अनधिकृत दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन दुकानों में कोई पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था नहीं थी, न ही आपातकालीन निकास का कोई इंतजाम था। दुकानों के बीच न्यूनतम दूरी भी नहीं थी, जिसके कारण आग इतनी तेजी से फैली। यह घटना नगर निगम और प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि शहर में इस तरह के अस्थायी व्यावसायिक ढांचों की नियमित जांच और निगरानी अत्यंत जरूरी है।
नागरिकों में रोष, स्थायी दमकल केंद्र की मांग
अग्निकांड के बाद स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में गहरा रोष देखने को मिला। उनका कहना है कि तेजाजी नगर एक तेजी से विकसित हो रहा घनी आबादी वाला क्षेत्र है, बावजूद इसके यहां कोई स्थायी दमकल केंद्र नहीं है। दमकल गाड़ियां दूर से आती हैं जिससे कीमती समय बर्बाद होता है और नुकसान बढ़ता है। नागरिकों ने एकजुट होकर मांग की है कि तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में एक स्थायी दमकल केंद्र स्थापित किया जाए और पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात किए जाएं। साथ ही अस्थायी दुकानों की नियमित जांच कर उन्हें अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए।
आग लगने का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस और दमकल विभाग द्वारा मामले की जांच जारी है और जल्द ही आधिकारिक बयान सामने आने की उम्मीद है।



