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यूनिक आईडी और अधिक पारदर्शिता
खरीदारों के लिए सबसे बड़ी राहत राज्य की हर वैध कॉलोनी को एक "यूनिक आईडी" (Unique ID) का अनिवार्य आवंटन है। खरीदारों को अब प्रॉपर्टी रजिस्ट्री पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना पड़ेगा; इसके बजाय, वे एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल पर इस यूनिक आईडी को दर्ज करके घर बैठे यह आसानी से चेक कर सकेंगे कि कॉलोनी वैध है या अवैध। इस प्रणाली को बिना सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं वाले अवैध प्लॉटों की बिक्री को पूरी तरह से रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
अवैध कॉलोनाइजरों पर सख्त कार्रवाई
यह कानून भू-माफियाओं और अवैध प्लॉटिंग करने वालों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाता है। बिना अनुमति अवैध कॉलोनियां विकसित करने पर अब सजा को बढ़ाकर 10 साल की कैद और ₹1 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने अवैध निर्माणों के खिलाफ एक सख्त और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत सबसे पहले 15 दिन के अंदर नोटिस जारी होगा। यदि अवैध निर्माण नहीं हटाया जाता है, तो संबंधित को खुद निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा, जिसके बाद प्रशासन अगले 15 दिन में खुद अतिक्रमण हटाएगा और जमीन जब्त कर लेगा। इसके अलावा, जिला कलेक्टरों को अब नोडल अधिकारी बनाया गया है, जिन्हें अवैध काम को तुरंत रोकने, अतिक्रमण ध्वस्त करने और एफआईआर दर्ज करने के पूरे अधिकार दिए गए हैं।
ईमानदार बिल्डरों के लिए आसान प्रक्रिया
धोखेबाजों पर नकेल कसने के साथ-साथ, सरकार ईमानदार रियल एस्टेट डेवलपर्स को भी बड़ी राहत दे रही है। नए कानून के तहत, बिल्डरों को अब अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के लिए कई तरह की मंजूरियां लेने की जरूरत नहीं होगी; केवल एक ही लाइसेंस से वे शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में कॉलोनियां विकसित कर सकेंगे। लालफीताशाही और सरकारी लेटलतीफी को कम करने के लिए, 5 साल में विकास पूरा होने पर 45 दिन में 'कम्प्लीशन सर्टिफिकेट' (कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र) देना अनिवार्य होगा। यदि देरी होती है, तो उसे 'डीम्ड परमिशन' (स्वत: अनुमति) लागू मान लिया जाएगा।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम 2026 रियल एस्टेट क्षेत्र में एक अत्यधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित माहौल बनाने जा रहा है, ताकि आम आदमी की जीवन भर की गाढ़ी कमाई पूरी तरह से सुरक्षित रहे।
